प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्‍न

ऐरा अधिनियम, 2008 संसद द्वारा अधिनियमित किया गया और इसे दिनांक 5.12.2008 के राजपत्र संख्‍या 36 द्वारा भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया था। इस अधिनियम में हवाईअड्डों पर दी जाने वाली वैमानिक सेवाओं के लिए टैरिफ और अन्‍य प्रभारों को विनियमित करने तथा हवाईअड्डों के निष्‍पादन मानकों को मॉनीटर करने के लिए विमानपत्‍तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (ऐरा) की स्‍थापना करने का प्रावधान है। इस प्रकार ऐरा देश में हवाईअडडा अवसंरचना क्षेत्र और हवाई नौचालन सेवाओं का आर्थिक विनियामक है।
केन्‍द्र सरकार द्वारा दिनांक 12 मई, 2009 की राजपत्र अधिसूचना (जीएसआर) संख्‍या 317 (ई) द्वारा दिनांक 12 मई, 2009 से प्राधिकरण की स्‍थापना अधिसूचित की गई।
  • वैमानिक सेवाओं के लिए निम्‍नलिखित को ध्‍यान में रखकर टैरिफ अवधारित करना-
    • विमानपत्‍तन की सुविधाओं के सुधार के लिए किया गया पूंजी व्‍यय और समय पर किया गया निवेश;
    • प्रदान की गई सेवा, उसकी गुणवत्‍ता और अन्‍य सुसंगत बातें;
    • दक्षता में सुधार लाने के लिए लागत; महाविमानपत्‍तनों का मितव्‍ययी और व्‍यवहार्य प्रचालन;
    • वैमानिक सेवाओं से भिन्‍न सेवाओं से प्राप्‍त राजस्‍व;
    • केन्‍द्रीय सरकार द्वारा किसी करार या समझौता ज्ञापन में या अन्‍यथा प्रस्‍थापित रियायत;
    • कोई अन्‍य बात जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सुसंगत हो;

    परंतु यह कि उपखंड (i) से उपखंड (vii) में विनिर्दिष्‍ट उपर्युक्‍त सभी या किसी बात को ध्‍यान में रखते हुए, भिन्‍न-भिन्‍न विमानपत्‍तनों के लिए भिन्‍न-भिन्‍न टैरिफ संरचनाएं नियत की जा सकेगी;

    • महाविमानपपत्‍तनों के संबंध में विकास शुल्‍क की रकम अवधारित करना;
    • वायुयान अधिनियम, 1934 के अधीन बनाए गए वायुयान नियम, 1937 के नियम 88 के अधीन उद्गृहीत यात्री सेवा शुल्‍क की रकम अवधारित करना;
    • सेवा की गुणवत्‍ता, निरंतता और विश्‍वसनीयता से संबंधित ऐसे उपवर्णित कार्यपालन मानकों को, जो केन्‍द्रीय सरकार या इस निमित्‍त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्‍ट किए जाएं, मानीटर करना;
    • ऐसी सूचना मांगना जो खंड (क) के अधीन टैरिफ के अवधारण के लिए आवश्‍यक हो;
    • टैरिफ से संबंधित ऐसे अन्‍य कृत्‍यों का निर्वहन करना जो उसे केन्‍द्रीय सरकार द्वारा सौंपे जाएं या जो इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्‍यक हो;
  • जहां प्राधिकरण ऐसा करना समीचीन समझता है, वहां वह लिखित आदेश द्वारा –
    • किसी सेवा प्रदाता से किसी भी समय लिखित में उसके कृत्‍यों से संबंधित ऐसी जानकारी या स्‍पष्‍टीकरण मांग सकेगा जिनकी प्राधिकरण, सेवा प्रदाता के संपादन का निर्धारण करने के लिए अपेक्षा करे; या
    • किसी सेवा प्रदाता के कार्यकलाप से संबंधित कोई जांच करने के लिए एक या अधिक व्‍यक्तियों को नियुक्‍त कर सकेगा; और
    • किसी सेवा प्रदाता को लेखा बहियों या अन्‍य दस्‍तावेजों का निरीक्षण करने के लिए अपने अधिकारियों या कर्मचारियों में से किसी को निदेश दे सकेगा। {धारा 14(1)}
  • प्राधिकरण को, सेवा प्रदाताओं के कार्य को मॉनीटर करने के लिए ऐसे निदेश जारी करने की शक्ति होगी जो वह सेवा प्रदाता द्वारा समुचित कार्य करने के लिए आवश्‍यक समझे। {धारा 14(4)}
  • प्राधिकरण, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्‍यों के निर्वहन के प्रयोजन के लिए, सेवा प्रदाताओं को समय-समय पर, ऐसे निदेश दे सकेगा, जो वह आवश्‍यक‍ समझे। {धारा15}
  • प्राधिकरण या उसके द्वारा इस निमित्‍त विशेष रूप से प्राधिकृत कोई अन्‍य अधिकारी, किसी ऐसे भवन या स्‍थान में प्रवेश कर सकेगा जहां प्राधिकरण के पास यह विश्‍वास करने का कारण है कि जांच की विषय वस्‍तु से संबंधित कोई दस्‍तावेज मिल सकेगा और किसी ऐसे दस्‍तावेज को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 100 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां तक वे लागू हों, अभिगृहित कर सकेगा या उसके उद्धरण या उसकी प्रतियां ले सकेगा। {धारा 16}

अधिनियम की धारा 13(2) के अनुसार प्राधिकरण, पांच वर्ष में एक बार टैरिफ का अवधारण करेगा और इस प्रकार अवधारित टैरिफ का यदि ऐसा करना समुचित और लोकहित में समझा जाए तो उक्‍त पांच वर्ष की अवधि के दौरान समय- समय पर, संशोधन कर सकेगा।

अध्‍यक्ष और सदस्‍य: प्राधिकरण, अध्‍यक्ष और दो ऐसे अन्‍य सदस्‍यों से मिलकर बनेगा जो केन्‍द्रीय सरकार द्वारा नियुक्‍त किए जाएंगे। परंतु जब भी प्राधिकरण किसी रक्षा वायु क्षेत्र में सिविल अत: क्षेत्र से संबंधित विषय का विनिश्चिय कर रहा हो तो उसमें रक्षा मंत्रालय द्वारा नामनिर्देशित किया जाने वाला भारत सरकार के अपर सचिव से अन्‍यून की पंक्ति का एक अतिरिक्‍त सदस्‍य उसमें होगा। {धारा 4(1)}

सचिव और अन्‍य अधिकारी: केन्‍द्रीय सरकार, एक सचिव को इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्‍यों के निर्वहन के लिए नियुक्‍त कर सकेगी। प्राधिकरण, ऐसे अधिकारियों और अन्‍य कर्मचारियों को नियुक्‍त कर सकेगा जो वह अधिनियम के अधीन अपने कृत्‍यों के दक्षतापूर्वक निर्वहन के लिए आवश्‍यक समझे। प्राधिकरण, विनियमों द्वारा विनिर्दिष्‍ट प्रक्रिया के अनुसार उतनी संख्‍या में सत्‍यनिष्‍ठा और उत्‍कृष्‍ट योग्‍यता वाले ऐसे विशेषज्ञों और वृत्तिकों को, जिनके पास अर्थशास्‍त्र, विधि, कारबार या विमानन से संबंधित ऐसी अन्‍य विद्या शाखाओं में विशेष ज्ञान और अनुभव है जो इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण को उसके कृत्‍यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए आवश्‍यक समझे जाएं, नियुक्‍त कर सकेगा। {धारा 9(1),(2) और (4)}

प्रयोक्‍ता विकास शुल्‍क भारतीय वायुयान नियमावली, 1937 के नियम 89 के अंतर्गत लगाया जाता है। प्रयोक्‍ता विकास शुल्‍क पारंपरिक रूप से हवाई अड्डे पर सेवाएं मुहैया कराने के लिए किए गए निवेशों पर हवाई अड्डा प्रचालकों के लिए उचित प्रतिलाभ सुनिश्चित करने के लिए लगाया जाता है। दूसरे शब्‍दों में राजस्‍व की किसी कमी को पूरा करने के लिए यूडीएफ लगाया जाता है ताकि निवेश पर उचित प्रतिलाभ सुनिश्चित हो सके।

भारतीय वायुयान नियमावली, 1937 के नियम 86, 88 और 89 के संदर्भ में महाविमानपत्‍तनों पर लगाए/ उद्गृहित किए जाने वाले टैरिफ प्रभार यात्री सेवा शुल्‍क और प्रयोक्‍ता विकास शुल्‍क की दरें ऐरा द्वारा निर्धारित किए अनुसार होंगी।